Aashadh Ke Niyam: आषाढ़ महीना भगवान विष्णु और शिव की पूजा का महीना है। इसी महीने से वर्षा ऋतु और चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। इसी महीन से देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चिरनिद्रा में चले जाते हैं और भगवान शिव जगत का पालन करते हैं। प्राचीन ग्रंथों में आषाढ़ महीने में जीवन निर्वाह और पूजा पाठ के विशेष नियम बताए गए हैं। इसके अनुसार आषाढ़ में व्यक्ति यदि इन 4 मंत्रों का जाप करें तो उसे धन धान्य की कमी नहीं रहेगी। इसी के साथ बताया गया है कि आषाढ़ में क्या करें और आषाढ़ में क्या न करें…
आषाढ़ में जीवन निर्वाह के नियम
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ में वर्षा ऋतु की शुरुआत हो जाती है। इसी के साथ रोग और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही यह जप तप का महीना है। इसलिए आषाढ़ के नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। इस महीने में अधिक जल वाले फलों जैसे- तरबूज, खरबूजे का सेवन करना चाहिए, जबकि ज्यादा तली भुनी, बासी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही आषाढ़ के महीने में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ शुभ होता है और एकादशी, अमावस्या और पूर्णिमा तिथि पर छाता, खड़ाऊ, आंवले, आम, खरबूजे, फल, मिठाई, दक्षिणा आदि से गरीबों जरूरतमंदों को संतुष्ट करना चाहिए। इससे पुण्य मिलता है।
आषाढ़ मास में क्या करें
- आषाढ़ में भगवान विष्णु की पूजा कर, उनके मंत्र का जाप करना चाहिए।
- आषाढ़ में स्नान दान का विशेष महत्व है, ऐसे में पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए।
- आषाढ़ में भगवान सूर्य की उपासना करें और उन्हें जल अर्पित करें।
- आषाढ़ में छाता, पानी से भरे घड़ा, खरबूजा, तरबूज, नमक, आंवले का दान शुभ है।
- आषाढ़ में भगवान विष्णु, भगवान शिव, मां दुर्गा, भगवान हनुमान की पूजा करने से ग्रह दोष से छुटकारा मिलता है।
आषाढ़ में क्या न करें
- आषाढ़ में भगवान श्री हरि चिरनिद्रा में रहते हैं, इसलिए इस महीने शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।
- आषाढ़ में जल का अपमान यानी पानी की बर्बादी भूलकर भी न करें।
- आषाढ़ में हरे पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करें।
4 आषाढ़ में तामसिक चीजों जैसे,मसूर की दाल, बैंगन शराब और मास मदिरा को न छूएं।
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आषाढ़ महीने में इन मंत्रों का जाप करें
आषाढ़ में रोज सुबह पूजा करते समय नीचे दिए गए इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। इनसे नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलता है और जीवन में धन धान्य की कमी नहीं होती।
- ऊँ नम: शिवाय, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय।
- ऊँ रामदूताय नम:।
- कृं कृष्णाय नम:।
- ऊँ रां रामाय नम:।